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KAUN HAI WO?
रात्रि का दूसरा पहर अचानक................. जाग जाता हूँ मैं ! जैसे किसी ने मुझे झकझोर कर जगाया हो याद आने लगती है किसी की जिसे मैने देखा नहीँ कभी........................ और शायद देख भी नहीँ पाउन्गा ऐसा लगता है पहली बार हो रहा है ये कभी नहीँ हुआ ऐसा कुछ शब्द है उसके मेरे पास........... एक काल्पनिक तस्वीर भी जिसे मैने गढ़ा है अपने हीं हाथों अपनी कल्पनाओं के पेन्सिल से कोरे पन्ने पर सोंच नहीँ पाता हूँ उससे मिलता तो क्या करता उसे निहारता रहता केवल खुश होता..........या फिर खुशी से मर जाता मगर ये सब तो कहने की बातें हैं केवल मैं जानता हूँ ऐसा कुच्छ नहीँ होता वास्तविक जीवन में मैं सोचता हूँ मिलता उससे तो केवल..... बातें करता रहता......... कुछ बताता....................कुछ पूछता कुछ कहता....................कुछ सुनता उसके कंधे पर सर रखकर सुकून के कुछ क्षण व्यतीत करता रोता रहता..........सूबकन लुटाता......लेकिन.... मैं आजकल रोता नहीँ हूँ.......कुछ भी हो उसके बारे में जानने की इक्षा जाग्रत करता हाँ ! क्योंकि....... मैं आजतक इतना सब होते हुए भी नहीँ जान पाया कि आख़िर वो है कौन ? ..................कू. संतोष............ ..................नई दिल्ली........... सी@संत
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