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YE TANHAI HIN SAATH BHANE LAGI HAI!
अब तो ये तन्हाई हीं साथ भाने लगी है, वो....! देख लो यारों मुझे छोड़के जाने लगी है ! पहले तो कहा करती थी........................ याद करोगे और सामने आ जाऊंगी तुम्हारे, कितने हसीन थे वो मेरे लिए नज़ारे ! अब तो बस उसकी यादों का हीं सहारा है , उससे मिलने का ना कोई आसरा है ! ढूंढता हूँ उसे वहीं जहाँ रोज़ मिला करती थी , गुस्से मे मुझको वो दुष्ट कहा करती थी ! मिलती नहीँ कहीं क्या करूँ समझ नहीँ पाता हूँ , कदम-कदम पर उसकी आहटें मैं पाता हूँ ! सुना नहीँ उसने मेरे दिल के फसाने को फिर भी मैं दुहराता हूँ, जो बहते हैं उसकी याद में दिल के आँसुओं को रोज़ मैं रुलाता हूँ ! डगमगाकर सम्भलते हुए चुभते कांटों को फूल समझता रहा, जिंदगी के दुहराए कहानी से बिसरी यादें चुराता रहा ! जैसे पहले था अकेला वैसे हीं रहना है , भूलना चाहते हुए भी उसे याद रखना है ! अब तो तन्हाई से हीं दिल लगाना है, इस तन्हाई के साथ हीं पार लग जाना है ! XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX फिर वहीं शाम, वहीं गम, वहीं तन्हाई है , दिल को समझाने तेरी याद चली आई है ! XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX तुम्हारे वश मे अगर हो तो भूल जाओ मुझे , तुम्हें भूलने में शायद मुझे जमाना लगे ....................कू. संतोष......................................... .....................नई दिल्ली................................. सी@संत
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