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KAANCH SE PYAR MAHANGA HOTA HAI !
काँच कि सतह पर न फिसलो उसकी चिकनाई पर न इतराओ वह बहुत जल्द टूट जाता है मुहब्बत क्या ? जब वह जिस्म में घुस जाता है दोस्ती तो खून से है उसकी वह तुम्हारे खून को चूस जाता है तुम उसका खून नहीँ कर सकते पर वह तुम्हारी जिंदगी का खून कर जाता है जिंदगी तो ख्वाब है तभी तो.........फिसलो मत.......न इतराओ काँच से प्यार महँगा होता है ! ..............कू. संतोष................ .............नई दिल्ली............... सी@संत
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