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MAIN AISA KYUN HUN ?
मैं ऐसा क्यों हूँ ? सोचता हूँ उलझ जाता हूँ इस क्यों के चक्कर में क्यों नहीँ स्वीकार कर पाता मैं सच्चाई क्यों नहीँ बदल पाता मैं खुद को........... दुनिया कितना बदल गयी है पर मैं नहीँ बदल पाता हूँ! अपना दर्द भुला लेता हूँ, दूसरों का दर्द ना भूल पाता हूँ! पर एक बात समझ नहीँ पाता हूँ ना जाने मैं ऐसा क्यों हूँ ? कोई कहता है मुझसे सोच अपनी हमेशा सकारात्मक रखो. पर नहीँ कर पाता ऐसा दुनिया का चक्र है गतिमान / परिवर्तित पर मैं वहीं हूँ अभी जहाँ से चला था कभी मेरा वहीं निर्दोष सा चेहरा नहीँ बदलना चाहता खुद को सारे बदलना चाहते है इस आधुनिक युग को देखकर पर मैं नहीँ चाहता ना जाने मैं ऐसा क्यों हूँ ? टूटती उम्मीदों के बावजूद भरी है दुनिया उम्मीदों से हीं पर मुझे कोई उम्मीद नहीँ किसी उम्मीद का इंतेज़ार भी नहीँ जो मुझे बदल दे आकर पर एक बात समझ नहीँ पाता हूँ ना जाने मैं ऐसा क्यों हूँ ? इस आधुनिक युग में ना जाने क्यों दिखावा है बहुत, सच्चाई से है परे ये झूठ मक्कारी बहुत ! स्वार्थ तो कूटकर भरा है आधुनिकता के चोले में, अनैतिक कर्म निकल रहे हैं नैतिकता के झोले में ! फिर क्यों बदल लूँ मैं खुद को फिर भी एक बात जो समझ नहीँ पाता हूँ ना जाने मैं ऐसा क्यों हूँ ? ना जाने मैं ऐसा क्यों हूँ ? ..................कू. संतोष......................... ................नई दिल्ली....................... सी@संत
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