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PREM PATRA
बन जाते हैं शब्द अपने आप........... शब्दों से मिलकर वाक्य अठखेलियाँ करते हैं पन्नों पर कलम के साथ.......... दिल के तार झनझना उठते हैं खुशियों से तो कभी गम से उन्हीं भावनाओं से प्रेरित होकर उभरते हैं दिल मे और छा जाते हैं पन्नों पर वाक्य रूपी शब्द कभी चाँद की चाँदनी मे तो कभी सूर्य की रोशनी मे हवा के वेग से फड़फड़ाता है पन्ना ऐसा लगता है उड़कर चला जाएगा वहाँ........... जहाँ से निकल रहें हों कुछ मंत्र यहीं तो है प्रेम पत्र..........................
दोस्तों कुछ दिनो बाद लौटा हूँ इस आइलैंड पर..... दिल्ली छोड़कर नोएडा आ गया हूँ बीजी रहता हूँ समय नहीं मिल पाता है कुछ पोस्ट करने का सबको मेरा नमस्कार ...... एक समान धन्यवाद नोटीस करने के लिए
कु. संतोष नोएडा
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