|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| |
|
|
|
AAKHIR JINDAGI KI PATRI HOTI KAUN SI HAI?
आख़िर जिंदगी क़ी पटरी होती कौन सी है ? दीवार पे चिपकी हुई छिपकली हमेशा लगी रहती है टोह में..... कीट - पतंगों की दौड़ती भागती जिंदगी मगर ! जब खुद पे आती है मौत...... अपनी हीं पुंछ जो उसका जीवन बचती है तोड़कर भागती है उस बीते वर्ष के समान जो भागता है नव-वर्ष को देखकर दूमा दबाए दोनों को देखा है मैने मगर समझ नहीं पाया मैं! आज तक..........आखिर जिंदगी की पटरी कौन सी होती है? ............................
|
|
| | |
|
|
|
|
|
|
|