PANCHHI
पहले झुरमुट में.पंछी चहकते थे अब पंछी तो हैं लेकिन झुरमुट नहीं इसीलिए तो वे चहकते नहीं...... कभी.....कभार चे-चे कर रह जाते हैं पंख फड़फड़ाकर भी पहले जैसे उड़ नहीं पाते हैं यादों में खोए हुए सपनों के साथ तोड़ा जी लेते हैं सांस नहीं आह भर गम को पी लेते हैं ! कु@संत गुडगाव
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