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BLOGGING
बड़े जतन से लिखता हूँ कोई कविता........ ऑफीस जाने के अवसर की ताक में रखता हूँ जेब मे वो पन्ना जिसपर लिखी होती है मेरी भावनाओं की स्याही से भरे शब्द पहुँचता हूँ ऑफीस बचते बचाते रेड लाइटों से यकीन नहीं होता पहुँचने पर अपने इतनी भीड़ के ठेलम ठेले में बैठता हूँ अपने केबिन में सबसे पहले ओन करता हूँ अपना कंप्यूटर सारे छूटे कामों को निबटाता हूँ और तब कहीं जाके करता हूँ पोस्ट अपनी कविता रेडिफफलाँड पर सोचता हूँ अलर्ट किन किन दोस्तों के पास पहुँचा होगा धुंधली पॅड जाती है पोस्ट करने का समय और तारीख की अचानक मेरे ई मेल पर आ जाते हैं कॉमेंट्स याद आ जाती है मुझे अपनी वो कविता जो लिखता हूँ मैं रात के एक बजे तक जागकर और आ जाते हैं आँखों मे आँसू छल-छल !!!!!!!!!!!!!! कु@संत नई दिल्ली
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