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NAHIN JANTA MAIN!!!!
इस दौड़ती भागती जिंदगी में कौन कितना दुखी है ? कौन कितने गम को भुलाने के लिए चेहरे पर अपने नक़ाब डाले है हंसी का..........मुस्कुराहट का जिस महानगर में रहता हूँ मैं अनैतिकता और नैतिकता पर बहस करने के लिए बुद्धिजीवियों का गुट और उनकी कभी ना खत्म होने वाली बहस में हस्तक्षेप नहीं करने के लिए जो कविता लिखनी चाहिए क्या लिखना होता है नहीं जानता मैं!!!!!! कु@संत नई दिल्ली
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