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AZADI KI 62 VARSH GAATH KAISI ?
जहाँ रोज़ हत्या, दंगा-फसाद अपहरण की ख़बरें अखबार में प्रकाशित होना आम बात है वहाँ ये आज़ादी की 62वीं वर्ष गांठ कैसी ? जहाँ धर्म की आड़ में होते बलात्कार, सत्यमेव जयते झंडे के नीचे भ्रस्ट आचार, जनता की जगह अधिनायकों का शाशन हो, वहाँ ये आज़ादी की 62वी वर्ष गाठ कैसी ? जहाँ मंदिर में अंधकार है तथा धर्म के नाम पर स्मगलिंग व्यापार है जहाँ झूठे मक्कार नेताओं की भरमार है वहाँ ये आज़ादी की 62वी वर्ष गाठ कैसी ? जहाँ अनेकता, हिंसा और अत्याचार की बातें है, जहाँ हर रातें नववधुयों की हत्या की राते है, जहाँ हर महीने नये नये घोटालों की बातें है, वहाँ ये आज़ादी की 62वीं वर्ष गांठ कैसी ? जहाँ झूँड के झूँड कंगाल हैं वहीं ठग पंडों के लिए प्रसिध्ह बंगाल है, दूध के लिए बसीचे बहाल है, ज्यालामुखी भूख से माँ तड़पति है, बुढ़ापा बिना सहारे है, जिसकी कोई पूछ नहीं है फिर वहाँ ये आज़ादी की 62वीं वर्ष गाठ कैसी ? जहाँ भाई भाई का दुश्मन है, माँ बाप को कौन समझने वाला है यहाँ ? विद्यार्थी तथा प्रोफेसोर में शिक्षा के नाम पर मोल व्यवहार है वहाँ ये आज़ादी की 62वीं वर्ष गाठ कैसी ? मिलते गांधीजी तो पूछता उनसे मैं !!!!!! कु@संत
नेताओं ने गांधीजी की कसम तक बेंची , कवियों ने निरालाजी की कसम तक बेंची, मत पूछ की इस दौर मे क्या-क्या न बिका अये दोस्त......... इंसानों ने आँखों की शरम तक बेंची !
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